
संसद के बजट सत्र के पहले दिन आज सुबह 10 बजे, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लकार्जु खरगे के कार्यालय में INDIA गठबंधन के प्रमुख नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सदन के भीतर सरकार के खिलाफ साझा रणनीति (Floor Strategy) पर चर्चा की। विपक्ष की मुख्य मांग MGNREGA को हटाकर लाए गए नए कानून ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन’ (VB-G RAM G) पर विस्तृत बहस कराना है। विपक्षी दलों का आरोप है कि नया कानून ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों को सीमित करता है और इसे ‘सप्लाई-ड्रिवन’ बनाकर बजट में कटौती की गई है।
इसके अलावा, विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि सपा और कांग्रेस इसे राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी सुधारों से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार इन मुद्दों पर दोबारा चर्चा के लिए ‘रिवर्स गियर’ नहीं लगाएगी, क्योंकि इन पर पिछले सत्र में बहस हो चुकी है। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह विधायी एजेंडा साझा करने में देरी कर रही है और महत्वपूर्ण मुद्दों से भाग रही है।
केवल घरेलू मुद्दे ही नहीं, बल्कि विपक्ष विदेशी नीति के मोर्चे पर भी सरकार को घेरने की तैयारी में है। विशेष रूप से अमेरिका के साथ संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति को लेकर चर्चा की मांग की गई है। लद्दाख में सुरक्षा स्थिति, जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा और बढ़ते प्रदूषण जैसे गंभीर विषयों पर भी विपक्षी सांसद ‘कार्य स्थगन प्रस्ताव’ (Adjournment Motion) लाने पर विचार कर रहे हैं। अखिलेश यादव की सांसदों के साथ लखनऊ की बैठक और राहुल गांधी की रायबरेली चौपाल के बाद, यह स्पष्ट है कि विपक्ष संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह आक्रामक रुख अपनाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा।



