
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज प्रगति मैदान में आयोजित ‘ग्लोबल एग्रो एक्सपो 2026’ का उद्घाटन करते हुए देश के अन्नदाताओं को एक नया और क्रांतिकारी विजन दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय किसानों को अब केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित रहने के बजाय “ग्लोबल मार्केट” को ध्यान में रखकर फसलें उगानी चाहिए। पीएम मोदी के अनुसार, जब तक हमारा किसान दुनिया के बाजार की मांग और गुणवत्ता के मानकों को नहीं समझेगा, तब तक उसकी आय में वह अपेक्षित उछाल नहीं आएगा जिसकी कल्पना ‘विकसित भारत’ के लिए की गई है। प्रधानमंत्री ने मोटे अनाज (श्री अन्न), जैविक उत्पादों और बागवानी के निर्यात पर विशेष जोर दिया, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी मांग में हैं। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ ‘कैश क्रॉप्स’ और हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर को अपनाएं, जिससे भारतीय कृषि उत्पाद वैश्विक फूड चेन का एक अनिवार्य हिस्सा बन सकें। सरकार इसके लिए आधुनिक भंडारण, कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स के बुनियादी ढांचे को रिकॉर्ड गति से मजबूत कर रही है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दूसरे चरण में तकनीक और डेटा के उपयोग को कृषि आय बढ़ाने का सबसे बड़ा हथियार बताया, जहाँ उन्होंने ‘डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन’ की उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे सॉइल हेल्थ कार्ड और ड्रोन तकनीक के माध्यम से किसान अपनी लागत कम कर रहे हैं और पैदावार की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बना रहे हैं। पीएम मोदी ने ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ODOP) योजना का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के हर जिले में कोई न कोई ऐसा कृषि उत्पाद है जो दुनिया के किसी कोने की मेज पर अपनी जगह बना सकता है। उन्होंने सहकारी समितियों और एफपीओ (FPO) को मजबूत करने की अपील की, ताकि छोटे किसान भी एकजुट होकर बड़े निर्यातकों के साथ सीधे व्यापार कर सकें। मोदी जी का मंत्र स्पष्ट है कि “बीज से लेकर बाजार तक” की दूरी को तकनीक के जरिए पाटकर ही किसान को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त किया जा सकता है। सरकार की नई निर्यात नीति का लक्ष्य अगले दो वर्षों में कृषि निर्यात को दोगुना करना है, जिसका सीधा लाभ सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंचेगा।
कार्यक्रम के समापन पर प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को वैश्विक स्वास्थ्य चेतना से जोड़ते हुए इसे किसानों के लिए एक ‘प्रीमियम अवसर’ करार दिया। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया रसायनों से मुक्त भोजन की तलाश में है और भारत की पारंपरिक खेती इस मांग को पूरा करने में सबसे सक्षम है। पीएम मोदी ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार ‘पीएम-किसान’ निधि और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के सुरक्षा कवच के साथ-साथ उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने हेतु हर संभव प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराएगी। उन्होंने 8 मार्च को होने वाले महिला दिवस का उल्लेख करते हुए ‘ड्रोन दीदी’ योजना की सराहना की, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव की नई इबारत लिख रही है। प्रधानमंत्री के इस ‘ग्लोबल मंत्र’ ने किसानों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है कि वे अब केवल उपज पैदा करने वाले नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के ‘कृषि उद्यमी’ बनेंगे। 2026 की यह नई कृषि नीति भारत को ‘दुनिया की फूड बास्केट’ बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित होगी।



