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अमित शाह का पटना दौरा: क्या बिहार की राजनीति में नीतीश युग का होने वाला है अंत?

बिहार की सियासत में आज का दिन एक बड़े ‘महा-बदलाव’ का गवाह बनने जा रहा है, क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद पटना पहुँच चुके हैं। पटना हवाई अड्डे पर उनके भव्य स्वागत के साथ ही बिहार के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जंगल की आग की तरह फैल गई है कि क्या नीतीश कुमार आज मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार आज ही राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं, जो उनके सक्रिय राज्य राजनीति से सन्यास और केंद्र की ओर प्रस्थान का स्पष्ट संकेत है।

अमित शाह की मौजूदगी इस बात की तस्दीक करती है कि एनडीए के भीतर सत्ता हस्तांतरण की पटकथा पूरी तरह तैयार हो चुकी है और अब केवल औपचारिक घोषणा का इंतजार है। पटना के राजभवन से लेकर भाजपा मुख्यालय तक मची हलचल यह बता रही है कि बिहार में ‘सुशासन बाबू’ का दो दशक लंबा सफर अब अपने अंतिम पड़ाव पर है।अमित शाह की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भाजपा विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगाना और गठबंधन के सहयोगियों के साथ भविष्य की रणनीति साझा करना है।

चर्चा है कि भाजपा इस बार बिहार की कमान अपने किसी कद्दावर नेता को सौंपकर राज्य में ‘पूर्ण केसरिया राज’ की नींव रखना चाहती है, जिसमें सम्राट चौधरी या नित्यानंद राय का नाम सबसे आगे चल रहा है। नीतीश कुमार ने अपने इस ‘एग्जिट प्लान’ के तहत संभवतः अपने करीबियों और परिवार के राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भाजपा आलाकमान से लंबी चर्चा की है। पटना के इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच जेडीयू और बीजेपी के कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं के अगले कदम को लेकर संशय और उत्साह के बीच झूल रहे हैं। गृह मंत्री का यह दौरा न केवल बिहार की सरकार बदलने के लिए है, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए एक नया ‘सोशल इंजीनियरिंग’ फॉर्मूला तैयार करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।दोपहर बाद होने वाली कैबिनेट की विशेष बैठक और उसके बाद राजभवन की संभावित गतिविधियों पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि बिहार का यह बदलाव राष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदल सकता है।

यदि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो यह भारतीय राजनीति के एक बड़े अध्याय का समापन होगा, जिसने बिहार को ‘जंगलराज’ से बाहर निकालने का दावा किया था। अमित शाह और नीतीश कुमार की बंद कमरे में होने वाली मुलाकात के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नई सरकार का स्वरूप कैसा होगा और इसमें जेडीयू की क्या भूमिका रहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में अब ‘डबल इंजन’ की सरकार नए अवतार में दिखेगी, जहाँ नेतृत्व की बागडोर पूरी तरह से भाजपा के हाथों में होगी। शाम तक पटना से आने वाली आधिकारिक खबरें यह तय कर देंगी कि बिहार का अगला ‘महारथी’ कौन होगा और नीतीश कुमार की नई पारी दिल्ली के गलियारों में किस भूमिका के साथ शुरू होगी।

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