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असम में कांग्रेस की ‘बड़ी टूट’: चुनाव से पहले भाजपा का पलड़ा हुआ और भी भारी!

असम विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच राज्य की राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल आ गया है, जहाँ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। गुवाहाटी स्थित भाजपा मुख्यालय में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की उपस्थिति में कांग्रेस के 5 मौजूदा विधायकों और 12 से अधिक जिला अध्यक्षों ने भगवा चोला ओढ़ लिया है। इस ‘बड़ी टूट’ ने राज्य में कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को हिलाकर रख दिया है, जिससे चुनावी समर शुरू होने से पहले ही पार्टी बैकफुट पर नजर आ रही है। भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व जमीनी कार्यकर्ताओं की भावनाओं से कट चुका है और पार्टी के पास राज्य के विकास के लिए कोई स्पष्ट विजन नहीं है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि असम अब ‘कांग्रेस मुक्त’ होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है और जनता केवल विकास की राजनीति को चुन रही है।

इस राजनीतिक दलबदल ने असम में सत्ताधारी भाजपा के पलड़े को और भी मजबूत कर दिया है, जिससे आगामी चुनावों में विपक्षी एकता के दावों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऊपरी असम और बराक घाटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कांग्रेस के कद्दावर नेताओं का साथ छोड़ना पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। भाजपा ने इस मौके को भुनाते हुए अपनी ‘डबल इंजन’ सरकार की उपलब्धियों को और जोर-शोर से प्रचारित करना शुरू कर दिया है, जिसमें ‘ओरुनोदोई’ योजना और बुनियादी ढांचे के विकास को प्रमुखता दी जा रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस टूट को भाजपा की “खरीद-फरोख्त की राजनीति” और “एजेंसियों का डर” करार दिया है, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष अब सार्वजनिक हो चुका है। गुवाहाटी के गलियारों में यह चर्चा आम है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम भी भाजपा का दामन थाम सकते हैं, जिससे चुनावी मुकाबला एकतरफा होने की संभावना बढ़ गई है।

दलबदल के इस दौर ने एआईयूडीएफ (AIUDF) और अन्य क्षेत्रीय दलों को भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है, क्योंकि कांग्रेस का कमजोर होना विपक्ष के वोटों के बिखराव का कारण बन सकता है। असम की जनता अब इन राजनीतिक घटनाक्रमों को बहुत करीब से देख रही है, जहाँ एक ओर भाजपा अपनी पकड़ मजबूत कर रही है और दूसरी ओर कांग्रेस अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। चुनाव आयोग द्वारा तारीखों के ऐलान से ठीक पहले हुई इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह भर दिया है, जबकि कांग्रेस खेमे में मायूसी का आलम है। मुख्यमंत्री सरमा ने हुंकार भरते हुए कहा है कि 2026 का चुनाव असम की अस्मिता और अखंडता का चुनाव होगा, जिसमें ‘घुसपैठ’ और ‘अराजकता’ का समर्थन करने वालों के लिए कोई जगह नहीं होगी। आने वाले कुछ हफ्तों में असम की राजनीति में और भी कई रोचक मोड़ देखने को मिल सकते हैं, जो राज्य के भविष्य की नई इबारत लिखेंगे।

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