
भारत की राजधानी दिल्ली आज एक ऐतिहासिक वैश्विक संगम की साक्षी बनी, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व के शीर्ष नेताओं की उपस्थिति में ‘संस्कारा’ (Samskara) ग्लोबल समिट का शंखनाद किया। प्रगति मैदान के भव्य भारत मंडपम में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में अमेरिका, जापान, फिनलैंड और जी-20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने हिस्सा लिया, जिससे दिल्ली पूरी दुनिया के कूटनीतिक आकर्षण का केंद्र बन गई। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि ‘संस्कारा’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और प्राचीन मानवीय मूल्यों के एकीकरण का एक वैश्विक दर्शन है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया युद्ध और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, तब भारत का ‘संस्कार’ आधारित नेतृत्व ही शांति और सह-अस्तित्व का एकमात्र मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
दिल्ली की सड़कों से लेकर शिखर सम्मेलन के गलियारों तक, भारत की बढ़ती ‘सॉफ्ट पावर’ और कूटनीतिक कौशल का लोहा पूरी दुनिया ने माना।शिखर सम्मेलन के मुख्य सत्र में पीएम मोदी ने ‘AI और आध्यात्म’ के अनूठे मेल पर जोर देते हुए वैश्विक डिजिटल ढांचे के लिए नए नैतिक प्रतिमान स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने फिनलैंड के राष्ट्रपति और अन्य सहयोगियों के साथ तकनीक के ‘मानवीय चेहरे’ पर चर्चा की, ताकि भविष्य का विकास विनाशकारी न होकर निर्माणकारी साबित हो सके। मोदी जी ने ‘संस्कारा’ के मंच से दुनिया को याद दिलाया कि भारत की प्रगति का मूल मंत्र ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ है, जहाँ विकास का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचना अनिवार्य है।
इस दौरान फिनलैंड, सिंगापुर और जापान के साथ कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का नया धुरंधर बनाने की दिशा में बड़े कदम हैं। प्रधानमंत्री का यह ‘शंखनाद’ स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि भारत अब वैश्विक नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि वैश्विक नियम बनाने वाला राष्ट्र बन चुका है।इस महा-जमावड़े के अंतिम चरण में पीएम मोदी ने जलवायु परिवर्तन और वैश्विक सुरक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भारत के ‘ग्रीन संस्कार’ विजन को प्रस्तुत किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने खड़े होकर सराहा। उन्होंने आतंकवाद और विस्तारवाद के खिलाफ एक साझा वैश्विक नीति बनाने की वकालत की, जिसमें ‘पारस्परिक सम्मान’ को सर्वोपरि रखने की बात कही गई। दिल्ली की इस महा-बैठक ने यह सिद्ध कर दिया है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया का ‘विश्वबंधु’ बनकर उभरा है, जो संकट के समय सबको साथ लेकर चलने का साहस रखता है। समिट के समापन पर जारी ‘दिल्ली घोषणापत्र’ में भारत के ‘संस्कारा’ दर्शन को भविष्य के वैश्विक शासन की नींव के रूप में स्वीकार किया गया है। यह आयोजन न केवल भारत की सांस्कृतिक श्रेष्ठता का प्रदर्शन था, बल्कि इसने 2026 की वैश्विक राजनीति में भारत के वर्चस्व को और अधिक गहराई के साथ स्थापित कर दिया है।



